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देव दीपावली 2026: कितने दीये जलाएँ, कहाँ रखें और दीपदान कैसे करें

कार्तिक पूर्णिमा, 24 नवंबर 2026 की देव दीपावली पर 11, 21 या 51 दीये क्यों, हर दीया कहाँ रखें, कौन सा तेल, और घाट या घर पर दीपदान की विधि।

अपडेट 11 October 2026 · 1 मिनट · वेदिकक्राफ्ट, मुरादाबाद

देव दीपावली पर घर में 11 दीये जलाना सबसे आम है, और घाट या मंदिर पर 21 या 51। गिनती विषम रखी जाती है और उनमें से एक दीया जल पर दीपदान के लिए होता है। इस साल देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन है।

काशी में इस शाम गंगा के घाटों की सीढ़ियाँ ऊपर से नीचे तक दीयों की कतारों से भर जाती हैं। इसे त्रिपुरोत्सव भी कहा जाता है। पर यह पर्व केवल काशी का नहीं है। उत्तर प्रदेश और बिहार के बहुत से घरों में उसी शाम आँगन, तुलसी और छत पर दीये रखे जाते हैं। नीचे वही सब व्यावहारिक बातें हैं: कितने, कहाँ, किस तेल से और दीपदान कैसे।

कितने दीये: 11, 21, 51 और क्यों

परंपरा विषम संख्या की है, जैसे दिवाली पर। कोई एक गिनती सबके लिए तय नहीं है, यह घर और इलाके के रिवाज़ से चलती है।

जगह आम गिनती किसके लिए
घर 11 फ़्लैट या छोटा आँगन, हर मुख्य जगह पर एक दीया
घाट या मंदिर 21 परिवार के साथ सीढ़ियों पर एक कतार
घाट या मंदिर 51 बड़ा परिवार, मोहल्ले या समिति की ओर से

गिनती से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि हर दीया ठीक से जले और सुरक्षित जगह रखा हो। 11 दीये जो देर तक जलें, 51 अधबुझे दीयों से अच्छे लगते हैं।

कहाँ रखें: द्वार, तुलसी, जल स्थान, मंदिर, छत, और एक दीपदान जल पर

11 दीयों का एक सरल बँटवारा यह है। अपने घर के हिसाब से इसे बदल लें।

  • मुख्य द्वार: दो दीये, चौखट के दोनों ओर
  • तुलसी: एक दीया, चौरे के पास
  • जल स्थान: एक दीया, जहाँ पीने का पानी रखा जाता है
  • घर का मंदिर: दो दीये, घी के
  • रसोई: एक दीया
  • छत या बालकनी: तीन दीये, मुँडेर पर
  • जल पर: एक दीया, दीपदान के लिए
दीये पर्दों, सूखे पत्तों और बच्चों की पहुँच से दूर रखें। छत की मुँडेर पर हवा तेज़ हो तो दीया दीवार की ओट में रखें।

कौन सा तेल और बत्ती

बाहर के दीयों में सरसों का तेल चलता है, क्योंकि वह देर तक जलता है और हवा में जल्दी नहीं बुझता। मंदिर के दीये में घी की परंपरा है। बत्ती रुई की रखें। खड़ी बत्ती की लौ सीधी रहती है, लंबी बत्ती चौड़े दीये में ठीक बैठती है। बत्ती को पहले तेल में भिगो लें, तब वह पहली बार में जल जाती है।

घाट पर दीपदान की विधि

  1. सूर्यास्त से पहले घाट पहुँचें और सीढ़ी पर साफ़, सूखी जगह चुनें।
  2. दीयों में तेल और बत्ती घर से भरकर ले जाएँ, ताकि घाट पर तेल न गिरे।
  3. पहले नदी को प्रणाम करें, फूल और अक्षत अर्पित करें।
  4. प्रदोष काल में दीये जलाएँ और सीढ़ी पर कतार में रखें।
  5. एक दीया पत्ते के दोने में रखकर धीरे से जल पर छोड़ें। यही दीपदान है।
  6. लौटते समय अपना सामान, खाली पैकेट और माचिस साथ ले आएँ।

जलाने का सही समय हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का पंचांग देख लें।

घर पर देव दीपावली (घाट न हो तो)

नदी पास न हो तो दीपदान घर पर भी किया जाता है। एक चौड़ी उरली या परात में साफ़ पानी भरें, उसमें फूल की पंखुड़ियाँ डालें और एक दीया उस पर तैराएँ या बीच में रखें। इसे तुलसी के पास या आँगन में रखें। बाकी दीये ऊपर बताए क्रम से लगा दें। कई परिवार पास के मंदिर या तालाब पर भी कुछ दीये रख आते हैं।

पीतल बनाम मिट्टी के दीये

दोनों का अपना काम है। जल पर छोड़ने के लिए मिट्टी या पत्ते का दीया ही रखें। पीतल का दीया घर, मंदिर और घाट की सीढ़ी के लिए है और हर साल फिर काम आता है। वेदिकक्राफ्ट पर दीयों की श्रेणी में 447 पीस हैं, जो ₹90 से शुरू होते हैं। इस पर्व के लिए चुने गए दीये देव दीपावली के दीये में देखें, और एक जैसे दीयों की कतार के लिए पीतल के दीया सेट। दिवाली की गिनती और जगहों के लिए दिवाली पर कितने दीये वाली गाइड भी पढ़ सकते हैं।

सवाल-जवाब

देव दीपावली क्या है?
कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली देवताओं की दिवाली, जो दिवाली के करीब एक पखवाड़े बाद आती है। काशी इसका केंद्र है।
कितने दीये जलाएँ?
विषम संख्या में: घर में 11, घाट या मंदिर पर 21 या 51। इनमें से एक दीया जल पर दीपदान के लिए रखें।
कौन सा तेल?
बाहर के दीयों में सरसों का तेल, मंदिर के दीये में घी।
क्या पीतल का दीया जल पर तैर सकता है?
छोटा चपटा दीया पत्ते या लकड़ी की तख्ती पर रखा जा सकता है। कछुआ दीया उरली के जल में रखा जाता है। नदी में पीतल का दीया न छोड़ें।
दीये जलाने का समय?
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में। अपने शहर का समय पंचांग से देखें।

इस गाइड से जुड़े सामान

और गाइड

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