छठ पूजा सामग्री लिस्ट 2026: सूप, दउरा, ठेकुआ से लेकर पीतल के लोटे तक
छठ पूजा 2026 की पूरी सामग्री लिस्ट: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक हर दिन क्या चाहिए, सूप और दउरा से लेकर अर्घ्य के लिए पीतल और तांबे के लोटे तक।
छठ 2026 की तारीखें: नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, उषा अर्घ्य 16 नवंबर। छठ की सामग्री दिवाली से अलग है: यहाँ मूर्ति नहीं, सूर्य देव और छठी मैया को बाँस के सूप और दउरे में फल, ठेकुआ और गन्ने के साथ अर्घ्य दिया जाता है। नीचे दिन-वार पूरी सूची है, और आखिर में वे गिनी-चुनी धातु की चीज़ें जो हर साल काम आती हैं।
पहले दिन: नहाय-खाय (13 नवंबर)
- व्रती के स्नान के लिए गंगाजल या नदी-तालाब का जल
- कद्दू-भात और चने की दाल के लिए लौकी (कद्दू), अरवा चावल, चना दाल, सेंधा नमक
- खाना पकाने के लिए पीतल या मिट्टी का बर्तन, नया या बिल्कुल साफ। छठ में लोहे और एल्युमिनियम से परहेज़ किया जाता है।
- आम की लकड़ी या चूल्हे के लिए उपले, जहाँ परंपरा हो
दूसरे दिन: खरना (14 नवंबर)
- रसियाव (गुड़ की खीर) के लिए गुड़, अरवा चावल, दूध
- रोटी के लिए गेहूँ का आटा और घी
- केले के पत्ते, जिन पर प्रसाद परोसा जाता है
- खीर पकाने के लिए पीतल की हांडी या पतीला, और परोसने के लिए पीतल की कटोरियाँ
- धूप, दीया, और छठी मैया के लिए सिंदूर
तीसरे दिन: संध्या अर्घ्य (15 नवंबर)
यह मुख्य दिन है। सूप और दउरा दोपहर तक भर लिए जाते हैं और शाम को घाट ले जाए जाते हैं।
बाँस का सामान
- बाँस के सूप, कम से कम 2, जिनमें प्रसाद रखकर अर्घ्य दिया जाता है
- बाँस का दउरा या डलिया, सूप और फल घाट तक ले जाने के लिए
- छोटी डगरी या टोकरी, अलग-अलग फल के लिए
प्रसाद
- ठेकुआ: गेहूँ का आटा, गुड़, घी, सौंफ, नारियल
- कसार या लड्डू: चावल का आटा और गुड़
- पत्ते सहित गन्ना, 5 या 7, जिनसे घाट पर मंडप बनता है
- डाभ नींबू (बड़ा नींबू), सिंघाड़ा, सुथनी, कंदमूल, अदरक और हल्दी के पौधे जड़ सहित
- केला घौद (पूरा गुच्छा), नारियल (पानी वाला और सूखा), सेब, नाशपाती, संतरा, शरीफा, अमरूद, आंवला
- पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, मिश्री, गुड़ की डली
- अक्षत (चावल), गेहूँ के दाने, चना, मूंग
पूजा का सामान
- सिंदूर (व्रती के लिए नारंगी, नाक से माँग तक), कुमकुम, हल्दी
- धूप, अगरबत्ती, कपूर, माचिस
- मिट्टी के दीये और पीतल का एक बड़ा दीया या कोसी (मिट्टी का हाथी-दीप, जहाँ कोसी भरने की मन्नत हो)
- सरसों का तेल, घी, रुई की बत्ती
- लाल या पीला कपड़ा, व्रती के लिए नई साड़ी या धोती (बिना सिला कपड़ा श्रेष्ठ)
- छोटे पीतल के लोटे या तांबे के लोटे: अर्घ्य देने के लिए। सूर्य को अर्घ्य पीतल या तांबे के लोटे से ही दिया जाता है, स्टील से नहीं।
- दूध, अर्घ्य के जल में मिलाने के लिए
- थाली, जिसमें सिंदूर, धूप और दीया घाट पर रखा जाए
- चटाई या आसन, घाट पर बैठने के लिए
चौथे दिन: उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर)
- वही सूप और दउरा, रात को ढककर रखे हुए, सुबह सूर्योदय से पहले घाट पर
- उगते सूर्य को अर्घ्य के लिए लोटा और जल में दूध
- पारण के लिए अदरक, गुड़, और घर पर कच्चा दूध या ठेकुआ प्रसाद
धातु की चीज़ें जो एक बार खरीदी जाती हैं
छठ का ज़्यादातर सामान हर साल नया आता है, सूप से लेकर गन्ने तक। चार चीज़ें हर छठ निकलती हैं और इन्हें पीतल या तांबे में लेना सही है, क्योंकि व्रत में लोहे और एल्युमिनियम का निषेध है:
| चीज़ | काम | क्या लें |
|---|---|---|
| अर्घ्य का लोटा | दोनों अर्घ्य | पीतल या तांबा, 500 मिली से 1 लीटर, टोंटी वाला हो तो जल की धार ठीक गिरती है |
| हांडी या पतीला | खरना की खीर, नहाय-खाय का भात | कलई वाली पीतल की हांडी, 3 से 5 लीटर |
| थाली और कटोरियाँ | प्रसाद और घाट की पूजा | पीतल की 10 से 12 इंच थाली, 4 कटोरियाँ |
| बड़ा दीया | घाट पर और कोसी भरने में | पीतल का पाँच बत्ती वाला दीया या कुबेर दीपक |
प्रिंट करने की छोटी सूची
- बाँस: सूप 2+, दउरा, डगरी
- प्रसाद: ठेकुआ, कसार, गन्ना 5 या 7, डाभ नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, केला घौद, नारियल, मौसमी फल, पान-सुपारी, अक्षत
- पूजा: सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, धूप, कपूर, दीये, तेल-घी-बत्ती, नया कपड़ा, दूध
- धातु: अर्घ्य का लोटा, हांडी, थाली-कटोरी, बड़ा दीया
- घाट: चटाई, थाली, माचिस, टॉर्च





