पूजा की थाली कैसे सजाएं: क्या रखें और कहाँ रखें
पूजा की थाली में बीच में दीया, दाईं ओर रोली अक्षत, बाईं ओर जल और घंटी। रोज़ के लिए 8 से 10 इंच, त्योहार के लिए 11 से 14 इंच की थाली।
पूजा की थाली सजाने का सीधा तरीका यह है: बीच में दीया, दाईं ओर रोली और अक्षत, बाईं ओर जल का लोटा और घंटी, और सामने फूल व प्रसाद। रोज़ की पूजा के लिए 8 से 10 इंच की थाली काफी है, त्योहार के लिए 11 से 14 इंच की। हर घर की रीति थोड़ी अलग होती है, इसलिए जो क्रम आपके घर में चलता आया है, वही पहले मानें।
रोज़ की पूजा की थाली में क्या रखें
- दीया, घी या तेल और बत्ती के साथ
- रोली या कुमकुम और अक्षत (साबुत चावल), छोटी कटोरियों में
- चंदन या हल्दी
- फूल और तुलसी दल
- अगरबत्ती या धूप और उसका स्टैंड
- घंटी
- जल का छोटा लोटा और आचमनी
- प्रसाद: मिश्री, फल या मिठाई
- कपूर, आरती के लिए
कौन सी चीज़ कहाँ रखें
थाली को घड़ी की तरह सोचें। जो चीज़ सबसे ज़्यादा उठानी है, वह दाहिने हाथ की तरफ रहे। आग और पानी एक दूसरे से दूर रहें।
| जगह | क्या रखें | क्यों |
|---|---|---|
| बीच में | दीया | थाली घुमाते समय लौ बीच में रहती है और तेल नहीं छलकता |
| दाईं ओर | रोली, अक्षत, चंदन | तिलक दाहिने हाथ से लगता है |
| बाईं ओर | जल का लोटा, घंटी | घंटी बाएँ हाथ से बजती है, और पानी दीये से दूर रहता है |
| सामने की ओर | फूल, प्रसाद | भगवान के सामने चढ़ाने में आसानी |
| अपनी ओर | अगरबत्ती, कपूर, माचिस | जलाने की चीज़ें हाथ के पास |
थाली सजाने के पाँच कदम
- थाली साफ और सूखी करें। गीली थाली पर रोली फैल जाती है।
- स्वस्तिक या ॐ बनाएँ। अनामिका उंगली से, रोली में दो बूँद पानी मिलाकर।
- किनारे सजाएँ। गेंदे की पंखुड़ियाँ या पान के पत्ते किनारे पर गोलाई में रखें। बीच का हिस्सा खाली छोड़ें।
- कटोरियाँ और लोटा रखें। ऊपर की तालिका के हिसाब से।
- दीया सबसे आखिर में। बत्ती घी में भिगोकर रखें और पूजा शुरू होने पर ही जलाएँ।
त्योहार पर थाली में क्या बदलता है
| त्योहार | रोज़ की थाली में क्या जोड़ें |
|---|---|
| दिवाली | खील बताशे, कमल या गेंदे के फूल, सिक्के, पान सुपारी, मौली, पंचामृत |
| करवा चौथ | करवा, छलनी, सिंदूर, मिठाई, पानी का गिलास |
| रक्षा बंधन | राखी, रोली अक्षत, मिठाई, नारियल |
| भाई दूज | तिलक की रोली, अक्षत, सूखा नारियल, मिठाई, कलावा |
दिवाली की पूरी सूची दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट में है, और भाई दूज की भाई दूज थाली सामग्री में। ये सूचियाँ आम चलन बताती हैं। आपके घर या इलाके में कोई चीज़ अलग हो तो घर के बड़ों या पुरोहित की बात मानें।
कितने इंच की थाली लें
थाली का नाप इस पर टिका है कि उस पर कितनी चीज़ें बैठनी हैं।
- 6 से 7 इंच: सिर्फ दीया, रोली और अक्षत। छोटे मंदिर या दफ्तर की मेज़ के लिए।
- 8 से 10 इंच: रोज़ की पूरी थाली। दीया, दो कटोरी, घंटी और फूल आराम से आते हैं।
- 11 से 14 इंच: त्योहार की थाली, जिसमें लोटा, प्रसाद और करवा या नारियल भी रखना है।
हमारे पीतल के पूजा थाली सेट 6 से 14 इंच में आते हैं, और कई सेट में दीया, घंटी, कलश और कटोरी साथ मिलती है। अलग थाली चाहिए तो थाली और पूजा प्लेट देखें।
सजावट जो टिके भी
थाली आरती में घूमती है, इसलिए सजावट हल्की और जमी हुई रखें। ढीले मोती और काँच के टुकड़े गिरते हैं। फूल की पंखुड़ियाँ, पान के पत्ते और रोली के बिंदु सबसे सुरक्षित हैं। कपूर को दीये से अलग छोटी कटोरी में रखें। पूजा के बाद थाली धोकर तुरंत सुखा दें। चमक लौटाने का तरीका पीतल के बर्तन कैसे साफ करें में है।







