महाशिवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट और घर पर अभिषेक की विधि
महाशिवरात्रि, शनिवार 6 मार्च 2027 की पूजा सामग्री की पूरी सूची: शिवलिंग, अभिषेक का लोटा, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, दीया और घर पर अभिषेक का क्रम।
महाशिवरात्रि की पूजा में ये चीज़ें लगती हैं: शिवलिंग, अभिषेक का लोटा, पंचामृत, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, चंदन, दीया, धूप और फल। इस बार महाशिवरात्रि शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। नीचे पूरी सूची है, फिर घर पर अभिषेक का क्रम, और वे चीज़ें जो शिव जी को नहीं चढ़तीं।
पूजा सामग्री की सूची
| वर्ग | सामग्री |
|---|---|
| स्थापना | शिवलिंग या शिव जी की मूर्ति, जलहरी या किनारे वाली थाली |
| अभिषेक | अभिषेक का लोटा, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गंगाजल |
| अर्पण | बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल, सफ़ेद फूल, चंदन, भस्म, अक्षत |
| आरती | पूजा थाली, दीया, घी, बाती, धूप, अगरबत्ती, घंटी |
| भोग | फल, बेर, मिठाई |
बेलपत्र, धतूरा और बेर एक शाम पहले ले आएँ। शिवरात्रि की सुबह मंदिर के बाहर की दुकानों पर ये जल्दी खत्म हो जाते हैं।
घर में शिवलिंग की स्थापना
शिवलिंग को जलहरी में रखें। जलहरी न हो तो गहरे किनारे वाली थाली लें, ताकि अभिषेक का जल और दूध बाहर न बहे। बहुत से घरों में जलहरी की नाली उत्तर की ओर रखी जाती है और पूजा करने वाला पूर्व की ओर मुँह करके बैठता है। नाली के नीचे एक कटोरा रख दें। घर के लिए परंपरा छोटे शिवलिंग की है, लगभग अँगूठे जितना। बड़े शिवलिंग मंदिरों में रखे जाते हैं।
वेदिकक्राफ्ट पर शिवलिंग 24 पीस में हैं, ₹210 से, 1 से 9.5 इंच तक। इनमें 23 शुद्ध पीतल के हैं, इसलिए हर पीस के नाम में धातु देख लें। नंदी रखते हों तो वह शिवलिंग की ओर मुँह करके बैठता है। नंदी 18 पीस में हैं, ₹890 से।
अभिषेक का क्रम: जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, जल
- जल: साफ़ जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर पतली धार से चढ़ाएँ।
- दूध: कच्चा दूध, धीरे-धीरे।
- दही: एक चम्मच।
- शहद: कुछ बूँदें।
- घी: छोटा चम्मच।
- शक्कर: एक चुटकी, या पानी में घोलकर।
- फिर जल: शिवलिंग साफ़ होने तक, उसके बाद साफ़ कपड़े से हल्के हाथ से पोंछ दें।
अभिषेक के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जप चलता रहता है। कुछ घरों में पाँचों चीज़ें मिलाकर पंचामृत एक साथ चढ़ाया जाता है। दोनों रीतियाँ प्रचलित हैं, अपने घर की मानें।
क्या चढ़ाएँ: बेलपत्र, धतूरा, चंदन, भस्म
- बेलपत्र: तीन पत्तियों वाला, बिना कटा-फटा, धोकर। चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखी जाती है।
- धतूरा और आक के फूल: भोलेनाथ को ये प्रिय माने जाते हैं। धतूरा ज़हरीला होता है, बच्चों से दूर रखें और बाद में हाथ धो लें।
- चंदन: लेप से त्रिपुंड, यानी तीन आड़ी रेखाएँ।
- भस्म: एक चुटकी, जिन घरों में चलन हो।
- सफ़ेद फूल और अक्षत: सबसे आखिर में।
इसके बाद दीया जलाएँ, धूप दिखाएँ, फल और बेर का भोग लगाएँ और घंटी के साथ आरती करें। रात भर जलने वाला दीया चाहिए तो गहरी कटोरी वाला अखंड दीया रखें।
शिव जी को क्या नहीं चढ़ता
परंपरा में ये चीज़ें शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जातीं: तुलसी के पत्ते, कुमकुम या सिंदूर, केतकी का फूल और नारियल पानी। कुमकुम की जगह चंदन लगता है। टूटे चावल भी नहीं चढ़ते, इसीलिए अक्षत साबुत दानों को कहते हैं। ये रीतियाँ प्रदेश और संप्रदाय के साथ कुछ बदलती हैं। मन में शंका हो तो घर के बड़ों से पूछ लें।
चार प्रहर की पूजा
जो लोग रात्रि जागरण करते हैं, वे रात को चार प्रहरों में बाँटकर हर प्रहर में अभिषेक दोहराते हैं। एक प्रचलित क्रम में पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद चढ़ता है। जल और बेलपत्र हर बार रहते हैं। आधी रात का समय, निशिता काल, मुख्य माना जाता है। प्रहर और निशिता काल का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें। जो गृहस्थ जागरण नहीं करते, वे शाम या रात में एक बार पूजा करते हैं।
इस रात के लिए लिया गया शिवलिंग, जलहरी, लोटा और थाली आगे हर सोमवार और पूरे सावन काम आते हैं। लोटे 85 पीस में हैं, ₹80 से। पूरी सामग्री महाशिवरात्रि पूजा के सामान में एक जगह है, जो ₹245 से शुरू होता है। समय पर पहुँचने के लिए 28 फरवरी तक ऑर्डर करें। घर के मंदिर के नाप की मूर्तियाँ छोटी शिव मूर्तियाँ में हैं। यही सूची अंग्रेज़ी में यहाँ है।







