मकर संक्रांति पर क्या दान करें: पूरी सूची और विधि
मकर संक्रांति, शुक्रवार 15 जनवरी 2027 पर क्या दान करें: तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल और पीतल-ताँबे के बर्तन। पूरी सूची, दान की विधि और समय।
मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी का सामान (चावल और उड़द दाल), घी, नमक, कंबल या ऊनी वस्त्र और पीतल या ताँबे के बर्तन दान किए जाते हैं। साथ में श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा रखी जाती है। इस बार मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है। नीचे पूरी सूची, दान का क्रम और बर्तन चुनने की बात है।
संक्रांति पर दान क्यों
इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण शुरू माना जाता है। कड़ी सर्दी का समय होता है, इसलिए दान की चीज़ें भी वही हैं जो इस मौसम में काम आती हैं: तिल, गुड़, घी, गरम खिचड़ी और कंबल। परंपरा यह है कि नई फसल का पहला हिस्सा बाँटकर खाया जाए। कितना दान हो, इसका कोई तय पैमाना नहीं है। जितना सहज बन पड़े, उतना ही ठीक माना जाता है।
क्या दान करें: पूरी सूची
| वर्ग | चीज़ें |
|---|---|
| अन्न | काले और सफ़ेद तिल, गुड़, चावल, उड़द दाल, घी, नमक |
| वस्त्र | कंबल या ऊनी कपड़े |
| बर्तन | पीतल या ताँबे का लोटा, थाली, गिलास या कटोरी |
| पूजा | सूर्य अर्घ्य के लिए जल, लाल फूल, अक्षत |
| अन्य | दक्षिणा |
- तिल और गुड़: इस पर्व की पहचान। तिल के लड्डू या तिलकुट बनाकर भी दिए जाते हैं।
- खिचड़ी का सामान: कच्चा चावल और उड़द दाल, साथ में घी और नमक। इसी से इस दिन का नाम कई जगह खिचड़ी पड़ा।
- कंबल: सर्दी में सबसे काम की चीज़। नया और साफ़ दें।
- बर्तन: खाली नहीं, तिल-गुड़ या अनाज भरकर।
दान की विधि: स्नान से संकल्प तक
- सुबह स्नान करें। नदी पास हो तो कई लोग वहीं जाते हैं, वरना घर पर ही।
- ताँबे या पीतल के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत लेकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- दान की सारी चीज़ें एक थाली या चौकी पर सजाकर रखें।
- हाथ में जल और तिल लेकर संकल्प लें, यानी मन में कहें कि यह दान किसके नाम से और किसे दिया जा रहा है।
- दान दें, फिर घर में खिचड़ी और तिल-गुड़ का प्रसाद बाँटें।
बर्तन का दान: लोटा, थाली, गिलास
बर्तन में सबसे ज़्यादा लोटा दिया जाता है, क्योंकि वह पूजा और पानी दोनों में रोज़ काम आता है। लोटे में तिल भरें, ऊपर गुड़ की डली रखें। थाली दे रहे हों तो उस पर खिचड़ी का पूरा सामान सजा दें। गिलास या कटोरी में घी या तिल रखकर दिया जाता है।
वेदिकक्राफ्ट पर लोटे 85 पीस में हैं, ₹80 से। पीतल के गिलास 40 पीस में हैं, ₹325 से। थालियाँ 89 पीस में हैं, ₹75 से। इस पर्व के लिए चुने गए बर्तन मकर संक्रांति के दान के बर्तन में एक जगह हैं, जो ₹180 से शुरू होते हैं। समय पर पहुँचने के लिए 9 जनवरी तक ऑर्डर कर दें। अलग से देखना हो तो लोटे और कलश तथा थालियाँ देखें। हर पीस पर वज़न और नाप लिखा है, दान के लिए हल्का और सादा पीस काफ़ी है।
घर का पुराना पीतल का बर्तन भी दान में दिया जाता है, बस वह साफ़ और बिना टूट-फूट का हो। चमकाने का तरीका पीतल के बर्तन कैसे साफ़ करें में है।
किसे और कब दें
दान ब्राह्मण या पुरोहित को, मंदिर में, किसी ज़रूरतमंद को या घर की बहन-बेटी को दिया जाता है। कई घरों में बहू अपनी सास को या ननद को तिल-गुड़ और बर्तन देती है। यह परंपरा घर-घर अलग है, इसलिए अपने बड़ों से पूछ लें। कंबल और खिचड़ी का सामान वहाँ दें जहाँ उसकी सच में ज़रूरत हो। दान सुबह स्नान और अर्घ्य के बाद दिया जाता है।
अलग-अलग प्रदेशों में: खिचड़ी, पोंगल, उत्तरायण
- उत्तर प्रदेश और बिहार: खिचड़ी। दही-चूड़ा, तिलकुट और खिचड़ी का दान।
- तमिलनाडु: पोंगल। नए चावल को दूध में बर्तन भरकर उफनने तक पकाया जाता है।
- गुजरात: उत्तरायण। पतंगें, उंधियू और तिल की चिक्की।
- महाराष्ट्र: तिलगुल बाँटने की परंपरा।
- पंजाब: एक दिन पहले लोहड़ी।
नाम और पकवान बदलते हैं, पर नई फसल बाँटने की बात हर जगह एक है।





