पीतल के बर्तन और मूर्ति कैसे साफ करें: दिवाली से पहले घर पर
नींबू-नमक, इमली, पीतांबरी या सिरका: पीतल की मूर्ति, दीये, थाली और बर्तन दिवाली से पहले कैसे चमकाएं, और लाख वाली पीतल पर क्या कभी न करें।
पीतल काला इसलिए पड़ता है क्योंकि उसमें मौजूद तांबा हवा, तेल और घी के धुएँ में मौजूद गंधक से प्रतिक्रिया करता है। यह मैल एक पतली परत है; कोई भी हल्का खट्टा पदार्थ इसे हटा देता है। असली काम है सही चीज़ के लिए सही खटास चुनना, और यह जानना कि किन चीज़ों को रगड़ना ही नहीं चाहिए। हम मुरादाबाद में पीतल ढालते हैं और साल में हज़ारों पीस साफ करते हैं। तरीका यह है।
पहले देखें, लाख (लैकर) चढ़ी है या नहीं
पिछले दस साल में बिका ज़्यादातर पीतल, और इस साइट का हर सामान, लैकर वाला है: पॉलिश के बाद एक पारदर्शी परत चढ़ाई जाती है ताकि चीज़ बिना साफ किए चमकती रहे। लैकर वाला पीतल शीशे जैसा दिखता है, उस पर पानी की बूँद ठहरती है, और महीनों तक उसका रंग नहीं बदलता। लैकर वाले पीतल पर नींबू, इमली या पीतांबरी बिल्कुल न लगाएँ। खटास से परत धुंधली पड़ जाती है। मुलायम सूखे कपड़े से पोंछें, या एक बूँद डिशवॉश वाले गीले कपड़े से, और तुरंत सुखा दें।
कच्चा (बिना लैकर का) पीतल हफ्तों में फीका पड़ जाता है, छूने पर हल्का खुरदुरा लगता है, और नीचे दिए तरीके उसी के लिए हैं। पुराने पारिवारिक बर्तन, मंदिर का सामान, जलाए जा चुके दीये, और जिन चीज़ों की लैकर जगह-जगह उतर गई हो, वे सब कच्चे पीतल में गिने जाते हैं।
चार तरीके, और कब कौन सा
| क्या | किसके लिए सही | कैसे | किस पर न लगाएँ |
|---|---|---|---|
| नींबू और नमक | थाली, लोटा, गिलास, सादी मूर्ति; हल्का से मध्यम मैल | नींबू काटें, नमक में डुबोएँ, गोल-गोल रगड़ें, धोएँ, सुखाएँ | नक्काशी वाले चेहरे (नमक खरोंच देता है), लैकर |
| इमली का गूदा | बारीक नक्काशी वाली मूर्ति, तेल के दाग वाले दीये, गहरा मैल | इमली 20 मिनट भिगोएँ, गूदा उंगली या मुलायम कपड़े से लगाएँ, 5 मिनट छोड़ें, धोएँ, सुखाएँ | लैकर |
| पीतांबरी या कोई भी पीतल पाउडर | बर्तनों और सादी चीज़ों पर जल्दी चमक | गीला करें, पाउडर छिड़कें, मुलायम स्क्रबर से रगड़ें, अच्छे से धोएँ | लैकर, एंटीक फिनिश, बहुत पतली चादर |
| सिरका, आटा और नमक का लेप | ज़िद्दी हरे धब्बे | बराबर मात्रा में लेप बनाएँ, 10 मिनट लगाएँ, रगड़ें, धोएँ | लैकर, नक्काशी |
चीज़ के हिसाब से
मूर्तियाँ
लैकर वाली मूर्ति: सिर्फ सूखा कपड़ा, दरारों के लिए मुलायम ब्रश। कच्ची मूर्ति: इमली का गूदा पुराने टूथब्रश से नक्काशी में भरें, नल के नीचे नहीं बल्कि कटोरे में धोएँ ताकि छोटे हिस्से सुरक्षित रहें, और हेयर ड्रायर की धीमी हवा या दस मिनट धूप में सुखाएँ। चेहरे पर कभी स्टील वूल या धातु का स्क्रबर न लगाएँ।
दीये
पहले तेल का मैल: डिशवॉश वाले गर्म पानी में दस मिनट भिगोएँ, कटोरी को मुलायम ब्रश से रगड़ें, फिर चमक के लिए नींबू-नमक। सरसों के तेल का मैल सबसे कड़ा होता है; दस मिनट लगा इमली का गूदा उसे गला देता है। रखने से पहले कटोरी पूरी सुखाएँ, वरना अगले साल बत्ती नहीं जलेगी।
थाली और लोटा
नींबू-नमक या पीतांबरी। नक्काशी वाली थाली: नमक की जगह इमली, ताकि खाँचे न खरोंचें। धोएँ, सुखाएँ, और कपड़े में रखें, प्लास्टिक में नहीं, जो नमी रोक लेता है।
कढ़ाई और खाना पकाने का पीतल
बाहर से थाली की तरह साफ करें। अंदर कलई होनी चाहिए; अगर धूसर परत घिसकर पीला पीतल दिखने लगे, तो दोबारा कलई होने तक उसमें खट्टा खाना न पकाएँ। दिवाली से पहले ज़्यादातर कस्बों में कलई वाले अब भी मिलते हैं।
एंटीक फिनिश वाला सामान
गहरा रंग जानबूझकर दिया गया है। झाड़ें, हल्के गीले कपड़े से पोंछें, और छोड़ दें। कोई भी खटास फिनिश उतार देती है और घर पर वह वापस नहीं आती।
क्या न करें
- ब्लीच नहीं, टॉयलेट क्लीनर नहीं, डिशवॉशर नहीं। तीनों पीतल में स्थायी गड्ढे कर देते हैं।
- पॉलिश या नक्काशी वाली सतह पर स्टील वूल या हरा स्कॉच-ब्राइट नहीं।
- पीतल को घंटों नींबू या सिरके में न छोड़ें। दस मिनट हद है।
- पीतल को प्लास्टिक की थैली में या रसोई के धुएँ के पास न रखें। कपड़ा, सूखी शेल्फ।
दिवाली के लिए समय योजना
- एक हफ्ता पहले: बर्तन और थालियाँ, क्योंकि इनमें सबसे ज़्यादा समय लगता है और रात भर सूखती हैं।
- तीन दिन पहले: दीये, ताकि धनतेरस तक सूख जाएँ।
- एक दिन पहले या दिवाली की सुबह: मूर्तियाँ, फिर पूजा में ही उन्हें पंचामृत से स्नान कराया जाता है।







